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रविवार, 26 फ़रवरी 2012

ऑस जब बन बूँद बहती,पात का कम्पन........






 ऑस जब  बन  बूँद  बहती,पात का  कम्पन ह्रदय  में   छा  रहा है
नीर का देखा रुदन किसने यहां पे,पीर वो भी संग ले के जा रहा
है



लोग जो हैं अब तलक मुझसे मिले ,शब्द से रिश्तो में अंतर आ रहा है
अर्थ अपनी जिन्दगी  का ढूँढ़ने  में, व्यर्थ ही जीवन यहाँ  पे  जा रहा है




इन उनीदी आँख के जब स्वप्न टूटे,दर्द में सुख बोध छिपता जा रहा है
तोड़ कर जब दायरे आगे  बढ़ा,शून्य में  पथ ज्ञान छिनता  जा  रहा 
है



प्रश्न बनके कल तलक था सामने,आज वो उत्तर मुझे समझा रहा है
अब अधेरी रात में भी दूर के,दीप का जलना  ह्रदय  को  भा  रहा  है



  विक्रम [पुन:प्रकाशित]

12 टिप्‍पणियां:

  1. प्रश्न बनके कल तलक था सामने,आज वो उत्तर मुझे समझा रहा है
    अब अधेरी रात में भी दूर के,दीप का जलना ह्रदय को भा रहा है
    Bahut,bahut sundar!

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  2. लोग जो हैं अब तलक मुझसे मिले ,शब्द से रिश्तो में अंतर आ रहा है
    अर्थ अपनी जिन्दगी का ढूँढ़ने में, व्यर्थ ही जीवन यहाँ पे जा रहा है,,, वाह

    उत्तर देंहटाएं
  3. लोग जो हैं अब तलक मुझसे मिले ,शब्द से रिश्तो में अंतर आ रहा है
    अर्थ अपनी जिन्दगी का ढूँढ़ने में, व्यर्थ ही जीवन यहाँ पे जा रहा है..

    भावपूर्ण सुंदर पंक्तियाँ,.
    बहुत अच्छी प्रस्तुति,

    NEW POST काव्यान्जलि ...: चिंगारी...

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्रश्न बनके कल तलक था सामने,आज वो उत्तर मुझे समझा रहा है ...

    बदलते समय के साथ अक्सर ऐसे बदलाव आते हैं ... और सहने भी पढते हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत खूब,अच्छी प्रस्तुति,

    उत्तर देंहटाएं
  7. इन उनीदी आँख के जब स्वप्न टूटे,दर्द में सुख बोध छिपता जा रहा है
    तोड़ कर जब दायरे आगे बढ़ा,शून्य में पथ ज्ञान छिनता जा रहा है

    ...बहुत सुन्दर और भावमयी प्रस्तुति...

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  8. प्रश्न बनके कल तलक था सामने,आज वो उत्तर मुझे समझा रहा है
    अब अधेरी रात में भी दूर के,दीप का जलना ह्रदय को भा रहा है

    वा,ह यह दीप ही है जो हमारा हौसला बनाये रखता है ।

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  9. इन उनीदी आँख के जब स्वप्न टूटे,दर्द में सुख बोध छिपता जा रहा है
    तोड़ कर जब दायरे आगे बढ़ा,शून्य में पथ ज्ञान छिनता जा रहा है
    bahut sunder
    badhai
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
  10. प्रश्न बनके कल तलक था सामने,आज वो उत्तर मुझे समझा रहा है
    अब अधेरी रात में भी दूर के,दीप का जलना ह्रदय को भा रहा है
    सुन्दर है

    उत्तर देंहटाएं
  11. लोग जो हैं अब तलक मुझसे मिले ,शब्द से रिश्तो में अंतर आ रहा है
    अर्थ अपनी जिन्दगी का ढूँढ़ने में, व्यर्थ ही जीवन यहाँ पे जा रहा है..

    बहुत खूब...................

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